Thursday, August 27, 2009

मई तोह बस मई हूँ.

मै कोई सूरज नही,
जो तुम्हे जला दूँ,
मई कोई सागर नही,
जो तुम्हे भीगा दूँ,
मै कोई सवेरा नही,
तोह खिलखिलाकर मुस्कुरा दूँ,
मैं कोई शाम नही,
जो अंधेरे की चादर फेला दूँ।

मै तोह बस मैं हूँ,
दुनिया की भीड़ में चलता हुआ,
सुबह के साथ चढ़ता हुआ,
शाम के साथ ढलता हुआ,
मै तोह बस मैं हूँ।

मै कोई चाँद नही,
जो रात को भी रिशनी ला दूँ,
मै कोई बदल नही,
जो किसी प्यासे की प्यास भुझा दूँ,
मै कोई अन्न का दाना नही,
जो किसी की भूक मिटा दूँ,
मै कोई भगवान् नही ,
जो हर रोते को हंसा दूँ।

मै तोह मै हूँ,
एक चोटी से हँसी जीता हुआ,
एक आंसू को अपनी पीटा हुआ,
एक गम को अपनी छुपता हुआ,
ज़िन्दगी के पन्नो को सीता हुआ।

मै तोह मै मै हूँ.

Wednesday, August 12, 2009

पर न जाने क्यूँ?

हर खुशी नज़राने में आती है,
कुछ नए ख्वाब दिखाती है,
पर जब लगने लगती है अपनी सी,
नज़रे बचाकर साथ छोड़ जाती है,

पर जाने क्यूँ?

कभी खुशियों से भरा होता है दिल,
और आँखें नम पड़ जाती है,
कभी गम में डूबा होता है दिल,
फिर भी लबों पे एक हँसी खिल जाती है।

पर जाने क्यूँ?

कभी तोह तनहा राहों जा शोर ,
तोह कभी भीड़ में भी अकेलापन,
कहीं कभी किस्मत का वक्त पे ज़ोर ,
एक अजीब सा दर्द दे जाती है।

पर जाने क्यूँ?

पर अब इन सवालो का जवाब ढूँढने निकल पड़ा हूँ,
अकेला इन तनहा राहों पर चल पड़ा हूँ,
जो जवाब मिले तोह ठीक होगा,
नही तोह इस सवाल को भी ख़ुद में समेटे खड़ा हूँ।

Tuesday, June 9, 2009

तेरे हुस्न की क्या तारीफ करूँ?

उसके हुस्न से तोह चाँद भी शर्माता है,
नही दिखते जब तुम,तभी अंधेरे निकलकर बाहर आता है,
घबराता है कहीं उसकी चाँदनी कहीं फीकी न पड़ जाए,
कहीं इस चाँद को देखकर ,सब उस चाँद को न भूल जाए।

उसकी खूबसूरती तोह समंदर की तरह है,
जो जब देखो ,एक नया और प्यारा एहसास लाती है,
बस फर्क यही है,की समंदर को तो पा सकता हूँ मै,
मगर उसकी एक झलक के लिए भी आंखें तरस जाती है।

उसकी हँसी एक पंछी की तरह है,
जहाँ जाती है खुशियाँ लाती है,
देख लूँ जो एक सुब उसे ,
तोह फीकी इस ज़िन्दगी में जैसे रंग भर जाती है।

चाहता हूँ उसे मिले सारा जहाँ और यह सारा आस्मां,
ताकि सपनो के पंख लगा कर उड़ सके वो,अपनी सपनो की उड़ान,
ताकि हम भी कह सके,की कभी हमने भी किया था प्यार,
और बस इतनी सी अपनी दास्तान॥

Saturday, May 30, 2009

एक शिकायत ख़ुद से.

क्यूँ इतनी नफरत थी मुझमें,
क्यूँ इतनी दर्द में जिया मै,
क्यूँ इतनी आग थी मुझे में,
क्यूँ घूट जहर के पिया मैं।

कभी न साथ दिया इस ज़िन्दगी ने,
पर न कभी किसी से शिकवा किया,
दर्द के शोलो पेय चला मैं,
पर हंस कर वो दर्द भी सहा।

खुशी की तलाश में मारा मारा फिरा,
इस तलाश में अपनी,कई बार संभला,कई बार गिरा,
पर न मिली खुशी और न मिले तुम,
एक बार फिर अपनी सवालो के साथ मैं,खड़ा गुमसुम।

अगर तू है कहीं खुदा,
तोह बस इतना सा जवाब देदे,
क्या मुझे नही था हक्क खुश रहने का,
चल,बस मेरे गमो का ही तू हिसाब देदे.
तोह एक श्याम और ढल गई,
तस्वीरे ज़िन्दगी थोडी बदल गई,
सोचा जब कल के बारें में,
तो तबियत थोडी मचल गई।

आदत हो गई थी तुम यूँ,
की यारों से मिलकर ही अत था सुकून,
पर आज जब ख़तम हो रहा एक अध्याय ,
तोह न जाने,कुछ बिचाद जाने की फिकर सता रही क्यूँ?

कुछ थी शिकायते ,कुछ थी बातें,
कुछ तनहा कटी जो रातें,
एक दिल की बात जो उससे कहनी चाही,
पर कुछ खो जाने के डर से जुबान कह न पाई।

पर याद रह जाएँगी ये बातें,
कुछ खट्टी,कुछ मीठी मुलाकातें,
तोह अब बढेंगे कदम,दुन्देंगे नई राहे,
अभी पुरी ज़िन्दगी पड़ी है पसारे अपनी बाहें।

तोह जीना अपनी ज़िन्दगी पूरी तरह,
यही इस दिल की तमन्ना है मेरी,
हंस लेंगे हम भी एक हँसी,
जब याद आयेगी तेरी..

Tuesday, May 5, 2009

Ek naya din,ek naya khayal.....

आज यह दिल कुछ घबराया सा है,
न चाहते हुए भी,यह डर मेरा हमसाया सा है,
चले थे जिन राहोय पेय अकेले हम,
आज भी खुद को कुछ तनहा पाया सा है।

कहें गम से भरी है दिल,
कहीं आंसुओं से नम है आँखें,
कहीं दर्द से भरे है लम्हे,
कहीं इन्तेज़ार से भरी यह आन्हे॥

हर घडी इस दिल में एक ख्याल होता है,
कुछ छूट गया क्या पीछे,बस यही सवाल होता है,
यूँ तो सवाल कई है,पर न जाने क्यूँ दिल इसपे अटका है,
मिल जाये जो जवाब इसका तोह दिल क्या ,जान भी इसपे सजदा है...

पर बहुत तेज़ दौड़ रही है ज़िन्दगी,
और बहुत तेज़ दौड़ रहे है हम,
अन्धो की इस अंधी दौड़ में,
लड़ खडा रहे मेरे कदम...

ज्यादा कुछ नहीं मांगता खुदा से,
बस इतनी सी दुआ मांगता हूँ,
भटक न जाये मेरा दिल कहीं,
इस अंधियारे में,बस वो हसीन सुबह मांगता हूँ........................

Friday, May 1, 2009

वो यार मेरा

उस यार की बेरुखी सही नही जाती,
देता है ऐसा दर्द,की तकलीफ कही नही जाती,
जब चाहा थम लिया हाथ,जब चाहा छोड़ दिया,
जिंदगी के इस सफर में,तुमने मुँह जो मोड़ लिया।

हमने न की शिकायत किसी से,न किया कोई शिकवा,
चलते चले गे इन राहों पेय,कभी न किसी से यह दर्द कहा,
क्या न किया था मैंने,क्या कमीं थी मेरे प्यार में,
ठोकर मारी दिल को मेरे,खड़ा रहा तनहा और लाचार मई।

दिल के इस बाज़ार में मेरा प्यार क्यूँ नीलम किया?,
रोंद दिया दिल को मेरे,और मुझको ही बदनाम किया,
हमनें तोह हंसके सही तेरी यह बेवफाई भी,
खुशी से सही तेरी यह रुसवाई ही भी,
तकलीफ तोह पहले ही था,इस बार बस शकल बदल कर ई थी।

चली गई मुझे छोड़ कर
मेरी राहों से अपना मुँह मोड़ कर,
खुश रहे तू सदा,
यही इस दिल की सदा है,
किया था प्यार मैंने कभी,
शायद यही मेरी सज़ा है।

पर बी ख़ुद से भी किया एक वादा ,
अब कभी न करेंगे प्यार,
कर लिया ,जिनता करना था मैने इंतज़ार,
सह लिया,जितना सहना था ,
अब न करेंगे हम किसी से दरकार,
अब न करेंगे हम किसी से दरकार.................

Wednesday, April 29, 2009

काश कभी होता ऐसा भी.

मोहब्बत जो मैंने की,
उसमें तेरी कोई खता नही,
दिन को तोह चैन पहले ही न था,
अब तोह रात की नींद का भी पता नही,
तेरी याद हर पल कुछ यूँ सताती है,
साँसों के बगैर धड़कन जैसे थम जाती है,
तेरा एहसास कुछ यूँ मेरे साथ है,
जिया हो हर पल जैसे,
कल ही की तोह बात है,
हर वक्त तेरा ख्याल जहन में यूँ रहता है,
भूल जायें तुझे ,एक पल न ऐसा होता है,
एक वादा किया था तुझसे,एक वादा किया था खुदसे,
न बदलेगा यह प्यार,यह वक्त चाहे बदल जाए,
रब से मांगी है दुआ,मेरे दिल में तू बस जाए,
जब तक चिरागों में लौ जलेगी,
जब तक सूरज में तपिश रहेगी,
वही रहेगी मोहब्बत मेरी
वैसी ही उसमें कशिश रहेगी,
अब तोह बस उस एक पल का इंतज़ार है,
जिस एक पल में तेरा इकरार है,
जो ठुकरा दिया तुने,तोह गम नही,
न बदलूँगा मैं,न बदलेगा मेरा प्यार है.

Tuesday, April 21, 2009

इन पालो के भी कुछ सवाल है.

आज हर लम्हा ,मुझसे है पूछता,
की क्या उया उन लम्हों का जो तुने अकेले बिताये,
क्या हुआ उन रातो का जो ,
तुने अकेले अश्क बहाए,
है कोई हिसाब ,उस दर्द का ,
जो तुने तनहा सहा,
है कोई हिसाब उस अकेलेपन,
जो तुने तनहा जीया,
यूँ तोह हर पल ज़िन्दगी की एक दास्ताँ गाता है,
हर एक पल,उस दर्द की कहानी सुनाता है,
अब तोह नैनो का पानी भी सूख गया,
अब तोह पलकों ने झपकना भी छोड़ दिया,
पर हर शाम,अकेलेपन में तेरी याद यूँ आती है,
की लगता है,यह अकेलापन ही मेरा साथी है,
कोई गिला नही मुझे,न कोई शिकवा है,
जो बीत गया सो बीत गया,
उसपे बस किसका है,
पर कभी जो हुई मुलाकात,तोह तुम्हे यह भरोसा दे जायेंगे,
ज़िन्दगी तोह कर ही थी तुम्हारे नाम,
आखिरी सांसे भी तुम्हरे नाम कर जायेंगे....

Monday, April 20, 2009

One day this happened that night...

In my dreams one night,
I saw you by my side,
holding my hand real tight,
felt like this moment should never pass by.

Under the twilight,we walked slow,
and in that moment,when the sweet winds blow,
I sat on my knee and asked for one chance,
to hold you near and have a dance,

for a moment,I was lost in you eyes,
at that moment,only you seemed to be true,
and everything else seems lies,
when we were lying under the sparkling light of moon,
and in mood to let this moment go away soon,
with having a beautiful skies,
with sparkling stars up there in highs.

I wanted the time to take some rest,
these were the moments some among the best,
and I thanked for the moment so fare,
then turned to say "I love you"but you wasn't there.

I tried to find you here and there,
but couldn't find you anywhere,
and soon I saw you in some one else arms,
I was paralyzed for a second,
stood there so composes,so calm.

I walked down real slow,
same was the wind,and same was the way it blow,
there was a flood of thought,
some battles of emotions ready to fought.

And then I asked the god
"Why you did this to me"
gave me such a pain,
and asking not to weep.

He then held my hand,
and took me to the skies,
up above the clouds,
in that blue ocean so high.

I asked him to stop,
and answer my questions,
so he stopped and there was an expression,
and I listen to every word of his,
and understood every suggestion.

Then I realized,that love is not for everyone,
some needs to walk alone to make this whole world run,
So I was the chosen one and I had to sacrifice,
Playing the game of my life,he played it really nice.
HE PLAYED IT REALLY NICE.

Wednesday, March 25, 2009

वो आखिरी लम्हें....

जीवन की राहों पे चलते,
जो तुम सबसे मुलाकात हुई,
पल आये और गए,
पर कभी न यह बात कही,
की याद आओगे तुम सब,
बहुत याद आयेंगी यह यादें,
याद आयेंगे वो पल,वो बातें.
दूर कभी परदेस में किसी परदेसी को,
सुनायेंगे यह किस्से ,यह बातें,
बतायेंगे ऐसे थे अपनी यार,
ऐसी थी अपनी मुलाकातें.
बातों बातों में जब बात तुम्हारी आयेगी,
नमकीन पानी की एक बूँद इन आँखों से छलक जायेगी,
याद आयेगा वो दोस्तों के साथ हसना ,खिलखिलाना.
वो बात बात पर डांटना ,रूठना और मानाना,
वो हर घंटे का प्यार, वो रोज़ नयी तकरार,
वो दिल थाम कर करना ,नुम्बेरो का इन्तेज़ार.
अब तो बस दिल में इन यादों,इन पलों,इन लम्हों को समेटता हूँ,
छूट न जाये कुछ पीछे,इन्हे मखमल में लपेटता हूँ.
बीत गया जो वक्त उस वक्त की रैत समेटता हूँ.
पलके कुछ नम है,दिल कुछ भारी भारी है,
याद रखेगी दुनिया,ऐसी अपनी यारी है,
सुनाऊंगा किस्से कहानियां,लोगों को,
की ऐसा अपना याराना था,
कुछ नये यारों से मिलने का,
वक्त ने दिया बहाना था.
अब न कुछ कह पाउँगा,
अब न कुछ लिख पाउँगा,
जो बीत गया ,सो बीत गया,
अब न कुछ कर पाउँगा,
जाते जाते मगर यह ज़रूर कहना चाहूँगा,
की माफ़ करना मुझे, रखा कोई मलाल, बात अधूरी,
बस कह दिया जो कहना था,यह कहना भी था ज़रूरी,
पर दिल में है एक बात,
की काश जीता हर पल तुम्हारे साथ.
हँसता,मुस्कुराता,खिलखिलाता ,
थाम कर दोस्तों का हाथ.
बस अब कलम को यहीं रोकता हूँ,
अब पलकों को यहीं पोचता हूँ,
छलक न जायें इन आँखों से सागर ,
इसलिए खुद को नींद की गोद में सुप्त हूँ.

Saturday, March 21, 2009

यह मेरा बावरा मन.

क्या करें इस बावरे मन का ,
कैसे इसे समझाए,
एक पल है यह कुछ चाहता,
दूजे पल कुछ और यह चाहें,
पलके झपकने से पहले बदल जाती है इच्छाएं,
कुछ सोच सकें ,उससे पहले बदल जाती है तम्मानाएं,
कभी तोह चाहे चूम लूँ इस आकाश की उचाई को,
कभी चाहे छु लूँ सागर की गहराई को,
कभी चाहे ,हर इच्छा को सच करके दिखाऊँ,
कभी चाहे ,हर सपने को सच से रूबरू करा दूँ,
असीमित है इच्छाएं पर,सीमित जहाँ है,
रुक जायें हम कहीं, इतना समय ही कहाँ है,
बस में नहीं था मन ,तभी तोह तुमसे प्यार हुआ,
हर पल इन नजरो को तेरा ही इंतज़ार हुआ,
पर यह समय और मन भी अजीब खेल दिखाता है,
हर ख्वाब के सच होने का ख्वाब दिखाकर,
नजरों के सामने ही उन्हे तोड़ जाता है,
अब न कुछ कह सकूँगा,
अब न कुछ लिख पाउँगा,
कभी मिले तुम,तोह एहसास यह ज़रूर कराऊंगा,
की तुम्ही से था प्यार,तुम्ही से ही रहेगा,
यह दिल तब भी तुम्हारा था,और हमेशा तुम्हारा ही रहेगा,
अब आखें नम है और दिल भर आया है,
न जाने क्यूँ यह मन फिर बीता वक्त ,नजरो के सामने लाया है,
न जाने क्यूँ यह बीता वक्त,नजरो के सामने लाया है??????????????????????

Monday, March 16, 2009

जाम के नशे में,
दिल हर राज़ कह जाता है,
जो होश न बयाँ करवा सके,
वो नशा बयाँ करवाता है,
लोग कहते है ,पीया न करो,
पीना तोह शराबियों का काम है ,
हम कहते है,पीते तोह सभी है,
हम तोह बस बदनाम है,
वो कहते है ,की तुम पीकर बहक जाते हो,
हम कहते है,बहकते तोह वो है,जो कभी संभल पाएं हो,
वो कहते है,तुम तोह बातों के जादूगर हो,
यह तुम्हारी कला है,
हम कहते है,अगर मैं पीकर सच हु बोलता,
तोह तेरे होश से तोह मेरा नशा भला है.

कुछ कर ऐसा .

आज मई ख़ुद से बातें करने लगा,
अकेलेपन की उस चुप्पी को तोड़ने लगा,
सोच थी जो अब तक मेरी,वो करने की घड़ी ई है,
खायी थी वो कसमें मैने,
उन्हे निभाने की घड़ी ई है,
अकेले आया है इस जग में मानुस,
कर जा इस जग में ऐसा कुछ,
की याद हमेशा के लिए रह जाएगा.

Friday, March 13, 2009

कुछ नई ख्वाहिशे है.

कुछ नही ख्वाहिशे है इस दिल में,
कुछ नई तम्मानाएं है ,
कुछ नई आरजू है इस दिल में,
कुछ नई आशाएं है,
नई रहे मिल रही,नए रास्ते खुल रहे,
एक नई किरण दिख रही,
एक नया उजाला हो रहा,
आज नया जोश है,आज नई उमंग है,
दिल में कुछ कर गुजरने की ,एक नई तरंग है,
उम्मीद है यह बनरहे ,ऐसी आशा करता हूँ,
पूरे साहस के साथ इन राहों पेय चलता हूँ,
रे मना चल पड़ इन राहों पर हंस कर,
जाने कहाँ कंजिल मिल जाए,
जाने कहाँ इन राहों ,शायद जिंदगी भी गले लगाये.

Friday, March 6, 2009

हर बार ऐसा क्यूँ होता है ??

हर बार आलम वाही होता है,
पेपर आते है और आता कुछ नही होता है,
एक दूसरे की शकले देखते है,
तुझे कुछ आता है मन में सवाल यही होता है,
किताबो की धूल पहली बार झडती है,
और स्य्ल्लाबुस पहली बार खुलता है,
रात -२ भर जग कर पढ़ते है,
अगली बार कुछ कर दिखायेंगे ,
मन में ख्याल यही होता है।
रोज़ नई कसमें खाते है,
रोज़ नए वादे करते है।
और रात बीतते ही,वो वादे भी गुल हो जाते है।
न जाने जिंदगी की तक़दीर क्या है,
न जाने इस दिल की तस्वीर में क्या है?
मगर ख़ुद से सवाल यही करता हूँ,
हर बार एक मंजिल पाकर,कुछ देर ठहरता हूँ।
अब तोह बस यही तम्मना है इस दिल की,
कुछ ऐसा कर जाऊँ,
मर भी जाऊँ अगर,तोह उस प्यार को अमर कर जाऊँ........

Friday, February 27, 2009

These are the words that I write right from my heart....

Every poem is written in both हिन्दी and English...
First the Hindi one and then the English one...

क्यूँ दुनिया का यह शोर अच नही लगता।
क्यूँ कभी दिल पे अपने कोई जोर नही चलता।
यह वक्त का तकाजा है या फिजा की गलती है,
क्योंन उन करोडो चेहरों में वोह एक चेहरा नही मिलता।

Kyun duniya ka yeh shor acha nahi lagta,
kyun kabhi dil pey apney koi jor nahi chalta,
yeh wakt ka takaja hai ya fiza ki galti hai,
kyun un karodo chehro mein vo ek chehra nahi milta....


दिल की राह पर यूँ अँधेरा छः रहा
की मै अपने दिल की आवाज़ भी अनसुना करता जा रहा,
यह कैसी कशमकश है जो कुछ समझ न आ रहा,
जो कल था अपना आज मुह फेरे है क्यूँ खड़ा,
कुछ कहते है हमे उनकी याद नही आती है,
अब क्या बताएं हम ,याद तोह उनकी आती है हम कभी भूल जाते है।

dil ki rah par yuh andhera cha raha,
ki mai apney dil ki awaaz ko unsuna karta ja raha,
yeh kaisi kashmakash,ki kuch samajh na araha,
jo kal tak tha apna,aj muh pherey hai kyun khada
kuch kehtey hai humein unki yaad nahi ati hai,
ab kya kahey yaad toh unki ati hai hum kabhi jinko bhul jatey hai.....