Friday, March 6, 2009

हर बार ऐसा क्यूँ होता है ??

हर बार आलम वाही होता है,
पेपर आते है और आता कुछ नही होता है,
एक दूसरे की शकले देखते है,
तुझे कुछ आता है मन में सवाल यही होता है,
किताबो की धूल पहली बार झडती है,
और स्य्ल्लाबुस पहली बार खुलता है,
रात -२ भर जग कर पढ़ते है,
अगली बार कुछ कर दिखायेंगे ,
मन में ख्याल यही होता है।
रोज़ नई कसमें खाते है,
रोज़ नए वादे करते है।
और रात बीतते ही,वो वादे भी गुल हो जाते है।
न जाने जिंदगी की तक़दीर क्या है,
न जाने इस दिल की तस्वीर में क्या है?
मगर ख़ुद से सवाल यही करता हूँ,
हर बार एक मंजिल पाकर,कुछ देर ठहरता हूँ।
अब तोह बस यही तम्मना है इस दिल की,
कुछ ऐसा कर जाऊँ,
मर भी जाऊँ अगर,तोह उस प्यार को अमर कर जाऊँ........

3 comments:

  1. बहुत सुंदर…..आपके इस सुंदर से चिटठे के साथ आपका ब्‍लाग जगत में स्‍वागत है…..आशा है , आप अपनी प्रतिभा से हिन्‍दी चिटठा जगत को समृद्ध करने और हिन्‍दी पाठको को ज्ञान बांटने के साथ साथ खुद भी सफलता प्राप्‍त करेंगे …..हमारी शुभकामनाएं आपके साथ हैं।

    ReplyDelete
  2. अगली बार कुछ कर दिखायेंगे ,
    मन में ख्याल यही होता है।
    रोज़ नई कसमें खाते है,
    रोज़ नए वादे करते है।
    और रात बीतते ही,वो वादे भी गुल हो जाते
    ब्लोगिंग जगत मे स्वागत है
    सुंदर रचना के लिए बधाई
    भावों की अभिव्यक्ति मन को सुकुन पहुंचाती है।
    लिखते रहि‌ए लिखने वालों की मंज़िल यही है ।
    कविता,गज़ल और शेर के लि‌ए मेरे ब्लोग पर स्वागत है ।
    मेरे द्वारा संपादित पत्रिका देखें
    www.zindagilive08.blogspot.com
    आर्ट के लि‌ए देखें
    www.chitrasansar.blogspot.com

    ReplyDelete