Wednesday, March 25, 2009

वो आखिरी लम्हें....

जीवन की राहों पे चलते,
जो तुम सबसे मुलाकात हुई,
पल आये और गए,
पर कभी न यह बात कही,
की याद आओगे तुम सब,
बहुत याद आयेंगी यह यादें,
याद आयेंगे वो पल,वो बातें.
दूर कभी परदेस में किसी परदेसी को,
सुनायेंगे यह किस्से ,यह बातें,
बतायेंगे ऐसे थे अपनी यार,
ऐसी थी अपनी मुलाकातें.
बातों बातों में जब बात तुम्हारी आयेगी,
नमकीन पानी की एक बूँद इन आँखों से छलक जायेगी,
याद आयेगा वो दोस्तों के साथ हसना ,खिलखिलाना.
वो बात बात पर डांटना ,रूठना और मानाना,
वो हर घंटे का प्यार, वो रोज़ नयी तकरार,
वो दिल थाम कर करना ,नुम्बेरो का इन्तेज़ार.
अब तो बस दिल में इन यादों,इन पलों,इन लम्हों को समेटता हूँ,
छूट न जाये कुछ पीछे,इन्हे मखमल में लपेटता हूँ.
बीत गया जो वक्त उस वक्त की रैत समेटता हूँ.
पलके कुछ नम है,दिल कुछ भारी भारी है,
याद रखेगी दुनिया,ऐसी अपनी यारी है,
सुनाऊंगा किस्से कहानियां,लोगों को,
की ऐसा अपना याराना था,
कुछ नये यारों से मिलने का,
वक्त ने दिया बहाना था.
अब न कुछ कह पाउँगा,
अब न कुछ लिख पाउँगा,
जो बीत गया ,सो बीत गया,
अब न कुछ कर पाउँगा,
जाते जाते मगर यह ज़रूर कहना चाहूँगा,
की माफ़ करना मुझे, रखा कोई मलाल, बात अधूरी,
बस कह दिया जो कहना था,यह कहना भी था ज़रूरी,
पर दिल में है एक बात,
की काश जीता हर पल तुम्हारे साथ.
हँसता,मुस्कुराता,खिलखिलाता ,
थाम कर दोस्तों का हाथ.
बस अब कलम को यहीं रोकता हूँ,
अब पलकों को यहीं पोचता हूँ,
छलक न जायें इन आँखों से सागर ,
इसलिए खुद को नींद की गोद में सुप्त हूँ.

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