मै कोई सूरज नही,
जो तुम्हे जला दूँ,
मई कोई सागर नही,
जो तुम्हे भीगा दूँ,
मै कोई सवेरा नही,
तोह खिलखिलाकर मुस्कुरा दूँ,
मैं कोई शाम नही,
जो अंधेरे की चादर फेला दूँ।
मै तोह बस मैं हूँ,
दुनिया की भीड़ में चलता हुआ,
सुबह के साथ चढ़ता हुआ,
शाम के साथ ढलता हुआ,
मै तोह बस मैं हूँ।
मै कोई चाँद नही,
जो रात को भी रिशनी ला दूँ,
मै कोई बदल नही,
जो किसी प्यासे की प्यास भुझा दूँ,
मै कोई अन्न का दाना नही,
जो किसी की भूक मिटा दूँ,
मै कोई भगवान् नही ,
जो हर रोते को हंसा दूँ।
मै तोह मै हूँ,
एक चोटी से हँसी जीता हुआ,
एक आंसू को अपनी पीटा हुआ,
एक गम को अपनी छुपता हुआ,
ज़िन्दगी के पन्नो को सीता हुआ।
मै तोह मै मै हूँ.
Thursday, August 27, 2009
Wednesday, August 12, 2009
पर न जाने क्यूँ?
हर खुशी नज़राने में आती है,
कुछ नए ख्वाब दिखाती है,
पर जब लगने लगती है अपनी सी,
नज़रे बचाकर साथ छोड़ जाती है,
पर न जाने क्यूँ?
कभी खुशियों से भरा होता है दिल,
और आँखें नम पड़ जाती है,
कभी गम में डूबा होता है दिल,
फिर भी लबों पे एक हँसी खिल जाती है।
पर न जाने क्यूँ?
कभी तोह तनहा राहों जा शोर ,
तोह कभी भीड़ में भी अकेलापन,
कहीं कभी किस्मत का वक्त पे ज़ोर ,
एक अजीब सा दर्द दे जाती है।
पर न जाने क्यूँ?
पर अब इन सवालो का जवाब ढूँढने निकल पड़ा हूँ,
अकेला इन तनहा राहों पर चल पड़ा हूँ,
जो जवाब मिले तोह ठीक होगा,
नही तोह इस सवाल को भी ख़ुद में समेटे खड़ा हूँ।
कुछ नए ख्वाब दिखाती है,
पर जब लगने लगती है अपनी सी,
नज़रे बचाकर साथ छोड़ जाती है,
पर न जाने क्यूँ?
कभी खुशियों से भरा होता है दिल,
और आँखें नम पड़ जाती है,
कभी गम में डूबा होता है दिल,
फिर भी लबों पे एक हँसी खिल जाती है।
पर न जाने क्यूँ?
कभी तोह तनहा राहों जा शोर ,
तोह कभी भीड़ में भी अकेलापन,
कहीं कभी किस्मत का वक्त पे ज़ोर ,
एक अजीब सा दर्द दे जाती है।
पर न जाने क्यूँ?
पर अब इन सवालो का जवाब ढूँढने निकल पड़ा हूँ,
अकेला इन तनहा राहों पर चल पड़ा हूँ,
जो जवाब मिले तोह ठीक होगा,
नही तोह इस सवाल को भी ख़ुद में समेटे खड़ा हूँ।
Subscribe to:
Comments (Atom)