मै कोई सूरज नही,
जो तुम्हे जला दूँ,
मई कोई सागर नही,
जो तुम्हे भीगा दूँ,
मै कोई सवेरा नही,
तोह खिलखिलाकर मुस्कुरा दूँ,
मैं कोई शाम नही,
जो अंधेरे की चादर फेला दूँ।
मै तोह बस मैं हूँ,
दुनिया की भीड़ में चलता हुआ,
सुबह के साथ चढ़ता हुआ,
शाम के साथ ढलता हुआ,
मै तोह बस मैं हूँ।
मै कोई चाँद नही,
जो रात को भी रिशनी ला दूँ,
मै कोई बदल नही,
जो किसी प्यासे की प्यास भुझा दूँ,
मै कोई अन्न का दाना नही,
जो किसी की भूक मिटा दूँ,
मै कोई भगवान् नही ,
जो हर रोते को हंसा दूँ।
मै तोह मै हूँ,
एक चोटी से हँसी जीता हुआ,
एक आंसू को अपनी पीटा हुआ,
एक गम को अपनी छुपता हुआ,
ज़िन्दगी के पन्नो को सीता हुआ।
मै तोह मै मै हूँ.
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