खड़ा हूँ वहीँ इंतज़ार में मैं तेरे ,
कारवां जहाँ से शुरू हुआ था,
तू नज़रे घुमा कर तोह देख ,
इस फासले की खाई को मिटा दूंगा मैं,
तू एक बार हाथ बढ़ा कर तोह देख।
फरेब का बाजार लगा है यहाँ,
तू आँखों पर से पट्टी हटा कर तो देख,
न होगा मुझसा यार कहाँ,
तू वक़्त की रेत को हटकर तो देख।
गहरे है झखम तेरे भी और मेरे भी ,
पर उस चोट की दर्द को भुलाकर तो देख ,
छट जायेगा अँधेरा सभी ,
दिल पर से गुज़रे वक़्त की कालिक हटकर तो देख।
चल रहे हैं एक राह पर अलग अलग ,
तू एक बार मेरा हाथ थामकर तो देख ,
यह राह फिर से गुलज़ार और पाकीज़ा होगी,
तू एक बार संग मेरे कदम बढाकर तोह देख।
कारवां जहाँ से शुरू हुआ था,
तू नज़रे घुमा कर तोह देख ,
इस फासले की खाई को मिटा दूंगा मैं,
तू एक बार हाथ बढ़ा कर तोह देख।
फरेब का बाजार लगा है यहाँ,
तू आँखों पर से पट्टी हटा कर तो देख,
न होगा मुझसा यार कहाँ,
तू वक़्त की रेत को हटकर तो देख।
गहरे है झखम तेरे भी और मेरे भी ,
पर उस चोट की दर्द को भुलाकर तो देख ,
छट जायेगा अँधेरा सभी ,
दिल पर से गुज़रे वक़्त की कालिक हटकर तो देख।
चल रहे हैं एक राह पर अलग अलग ,
तू एक बार मेरा हाथ थामकर तो देख ,
यह राह फिर से गुलज़ार और पाकीज़ा होगी,
तू एक बार संग मेरे कदम बढाकर तोह देख।