Tuesday, September 15, 2015

ऐसा करके तुझे क्या मज़ा आता है

बिलख रहीं हैं आँखें किसी की,
देखकर किसी को दिल भर आता है,
इतना तोह बता ऐ ईश्वर मेरे,
यह सब करके तुझे क्या मज़ा आता है। 

सर्व प्रथम, सर्व शक्तिमान,सर्व भूत हो तुम,
फिर भी पूछने को जी चाहता है,
ज़रा सुन तोह सही बात मेरी,
यह सब करके तुझे क्या मज़ा आता है। 

मासूम था वो जो चला गया,
जिस नीर को तरसती है दुनिया ,
उस सागर के पायदान पर ,
औंधें मुँह फिसल गया ,
माँ का आँचल न मिल सका उसे ,
पिता का वक़्त रोकर गुज़र जाता हैं,
अरे ज़रा कह कर तोह जा ,
यह सब करके तुझे क्या मज़ा आता है। 

कहता है इश्क़ जैसी खूबसूरत चीज़ नहीं ,
पर पूरी बात नहीं बताता है,
टूटता है दिल किसी का कहीं, भिखरते हैं जज़्बात कहीं ,
और फिर भी हौंसला रखने को समझाता है 
ए खुदा मेरे यार यह तोह बता ,
तुझे यह सब करके क्या मज़ा आता है। 

खुद तोह नीलम की चादर ओढ़े,
जा बैठा है उस आसमां के परे ,
न जाने इतनी दूर से किसी का दर्द तुझे दिख भी पाता है ,
ज़रा इतना तोह बता मालिक मेरे ,
यह सब करके तुझे क्या मज़ा आता है। 

कभी जो तुम नीचे आये ,
या कभी जब मैं ऊपर आयूंगा,
और अगर मिले जो हम कभी,
तोह यह सवाल तुझसे पूछता जायूँगा,
मैंने व्रत, त्यौहार, पूजा, प्रसाद,तीरथ, धाम सब किए ,
फिर भी तू मुझे कितना सताता है,
ज़रा इतना तोह बता,
बंधू , सखा , माता , पिता,प्रेम , त्याग, अभिमान , अभिशाप मेरे ,
यह सब करके तुझे क्या मज़ा आता है 
यह सब करके तुझे क्या मज़ा आता है 

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