Monday, August 31, 2015

लो एक और शाम ढल गयी,
रुख-ए-ज़िन्दगी थोड़ी और बदल गयी,
अभी तोह शुरू हुआ था कारवां,
और अभी मंज़िलें भी बदल गई। 

यार मिले कुछ नए पुराने,
थे अपने अपने जिनके फ़साने,
कोई करता था बात बीते वक़्त की,
कोई समझाता था नए अफ़साने। 

वक़्त कैसे गुज़रा पता भी न चला,
अभी तोह आया ही था मैं,
और लो अभी चल भी दीया। 

पर यह सिर्फ इस कारवां का अंत है,
यारी हमारी जारी रहेगी,
किस्से कहानियों का याराना है हमारा,
बातें अधूरी थी,
बातें अधूरी रहेंगी। 

Sunday, August 30, 2015

ये मेरा वादा है

रुक जाता हूँ दर पे तेरी,
तेरे एक दीदार की खातिर,
शायद तुझमें भी ज़िंदा हो कहीं,
अपने उस जस्बात की खातिर।

तस्सवुर में तेरे बीतती है शामें मेरी,
राते तनहा कट जाती हैं,
वो धीरे से कही कई बातें तेरी,
याद मुझे बहुत आती हैं। 

तेरा वो मेरी बाहों में सिमट जाना,
कंधे पर मेरे सर रखकर अपना,
धीरे से कानो में कुछ कह जाना,
तेरा वो बात को सबसे पहले मुझे बताना,
छोटी छोटी खुशियों पर खिलखिलाकर मुस्कुराना। 

फिर एक पल में बदल गया सब,
ख़ास था दिन बहुत,
कहा था तूने जब। 

पर वादा किया था तुझसे,
और मैं हर वादा निभाउंगा,
चुप रहूँगा कुछ न कहूँगा,
पर तेरा इंतज़ार करता जायूँगा। 

अपने यकीन पर यकीन है मुझे,
यकीन है उस खुदा पर भी,
यकीन है तेरी हर कही अनकही बात का ,
यकीन है तेरे हर एह्साह का भी। 

पर एक वादा खुद से भी है,
और इस वादे को भी मैं तोड़ूंगा नहीं,
अब या तोह यह ज़िन्दगी तेरे साथ बीतेगी,
या किसी के साथ नहीं।