जीवन की राहों पे चलते,
जो तुम सबसे मुलाकात हुई,
पल आये और गए,
पर कभी न यह बात कही,
की याद आओगे तुम सब,
बहुत याद आयेंगी यह यादें,
याद आयेंगे वो पल,वो बातें.
दूर कभी परदेस में किसी परदेसी को,
सुनायेंगे यह किस्से ,यह बातें,
बतायेंगे ऐसे थे अपनी यार,
ऐसी थी अपनी मुलाकातें.
बातों बातों में जब बात तुम्हारी आयेगी,
नमकीन पानी की एक बूँद इन आँखों से छलक जायेगी,
याद आयेगा वो दोस्तों के साथ हसना ,खिलखिलाना.
वो बात बात पर डांटना ,रूठना और मानाना,
वो हर घंटे का प्यार, वो रोज़ नयी तकरार,
वो दिल थाम कर करना ,नुम्बेरो का इन्तेज़ार.
अब तो बस दिल में इन यादों,इन पलों,इन लम्हों को समेटता हूँ,
छूट न जाये कुछ पीछे,इन्हे मखमल में लपेटता हूँ.
बीत गया जो वक्त उस वक्त की रैत समेटता हूँ.
पलके कुछ नम है,दिल कुछ भारी भारी है,
याद रखेगी दुनिया,ऐसी अपनी यारी है,
सुनाऊंगा किस्से कहानियां,लोगों को,
की ऐसा अपना याराना था,
कुछ नये यारों से मिलने का,
वक्त ने दिया बहाना था.
अब न कुछ कह पाउँगा,
अब न कुछ लिख पाउँगा,
जो बीत गया ,सो बीत गया,
अब न कुछ कर पाउँगा,
जाते जाते मगर यह ज़रूर कहना चाहूँगा,
की माफ़ करना मुझे,न रखा कोई मलाल,न बात अधूरी,
बस कह दिया जो कहना था,यह कहना भी था ज़रूरी,
पर दिल में है एक बात,
की काश जीता हर पल तुम्हारे साथ.
हँसता,मुस्कुराता,खिलखिलाता ,
थाम कर दोस्तों का हाथ.
बस अब कलम को यहीं रोकता हूँ,
अब पलकों को यहीं पोचता हूँ,
छलक न जायें इन आँखों से सागर ,
इसलिए खुद को नींद की गोद में सुप्त हूँ.
Wednesday, March 25, 2009
Saturday, March 21, 2009
यह मेरा बावरा मन.
क्या करें इस बावरे मन का ,
कैसे इसे समझाए,
एक पल है यह कुछ चाहता,
दूजे पल कुछ और यह चाहें,
पलके झपकने से पहले बदल जाती है इच्छाएं,
कुछ सोच सकें ,उससे पहले बदल जाती है तम्मानाएं,
कभी तोह चाहे चूम लूँ इस आकाश की उचाई को,
कभी चाहे छु लूँ सागर की गहराई को,
कभी चाहे ,हर इच्छा को सच करके दिखाऊँ,
कभी चाहे ,हर सपने को सच से रूबरू करा दूँ,
असीमित है इच्छाएं पर,सीमित जहाँ है,
रुक जायें हम कहीं, इतना समय ही कहाँ है,
बस में नहीं था मन ,तभी तोह तुमसे प्यार हुआ,
हर पल इन नजरो को तेरा ही इंतज़ार हुआ,
पर यह समय और मन भी अजीब खेल दिखाता है,
हर ख्वाब के सच होने का ख्वाब दिखाकर,
नजरों के सामने ही उन्हे तोड़ जाता है,
अब न कुछ कह सकूँगा,
अब न कुछ लिख पाउँगा,
कभी मिले तुम,तोह एहसास यह ज़रूर कराऊंगा,
की तुम्ही से था प्यार,तुम्ही से ही रहेगा,
यह दिल तब भी तुम्हारा था,और हमेशा तुम्हारा ही रहेगा,
अब आखें नम है और दिल भर आया है,
न जाने क्यूँ यह मन फिर बीता वक्त ,नजरो के सामने लाया है,
न जाने क्यूँ यह बीता वक्त,नजरो के सामने लाया है??????????????????????
कैसे इसे समझाए,
एक पल है यह कुछ चाहता,
दूजे पल कुछ और यह चाहें,
पलके झपकने से पहले बदल जाती है इच्छाएं,
कुछ सोच सकें ,उससे पहले बदल जाती है तम्मानाएं,
कभी तोह चाहे चूम लूँ इस आकाश की उचाई को,
कभी चाहे छु लूँ सागर की गहराई को,
कभी चाहे ,हर इच्छा को सच करके दिखाऊँ,
कभी चाहे ,हर सपने को सच से रूबरू करा दूँ,
असीमित है इच्छाएं पर,सीमित जहाँ है,
रुक जायें हम कहीं, इतना समय ही कहाँ है,
बस में नहीं था मन ,तभी तोह तुमसे प्यार हुआ,
हर पल इन नजरो को तेरा ही इंतज़ार हुआ,
पर यह समय और मन भी अजीब खेल दिखाता है,
हर ख्वाब के सच होने का ख्वाब दिखाकर,
नजरों के सामने ही उन्हे तोड़ जाता है,
अब न कुछ कह सकूँगा,
अब न कुछ लिख पाउँगा,
कभी मिले तुम,तोह एहसास यह ज़रूर कराऊंगा,
की तुम्ही से था प्यार,तुम्ही से ही रहेगा,
यह दिल तब भी तुम्हारा था,और हमेशा तुम्हारा ही रहेगा,
अब आखें नम है और दिल भर आया है,
न जाने क्यूँ यह मन फिर बीता वक्त ,नजरो के सामने लाया है,
न जाने क्यूँ यह बीता वक्त,नजरो के सामने लाया है??????????????????????
Monday, March 16, 2009
जाम के नशे में,
दिल हर राज़ कह जाता है,
जो होश न बयाँ करवा सके,
वो नशा बयाँ करवाता है,
लोग कहते है ,पीया न करो,
पीना तोह शराबियों का काम है ,
हम कहते है,पीते तोह सभी है,
हम तोह बस बदनाम है,
वो कहते है ,की तुम पीकर बहक जाते हो,
हम कहते है,बहकते तोह वो है,जो कभी संभल पाएं हो,
वो कहते है,तुम तोह बातों के जादूगर हो,
यह तुम्हारी कला है,
हम कहते है,अगर मैं पीकर सच हु बोलता,
तोह तेरे होश से तोह मेरा नशा भला है.
दिल हर राज़ कह जाता है,
जो होश न बयाँ करवा सके,
वो नशा बयाँ करवाता है,
लोग कहते है ,पीया न करो,
पीना तोह शराबियों का काम है ,
हम कहते है,पीते तोह सभी है,
हम तोह बस बदनाम है,
वो कहते है ,की तुम पीकर बहक जाते हो,
हम कहते है,बहकते तोह वो है,जो कभी संभल पाएं हो,
वो कहते है,तुम तोह बातों के जादूगर हो,
यह तुम्हारी कला है,
हम कहते है,अगर मैं पीकर सच हु बोलता,
तोह तेरे होश से तोह मेरा नशा भला है.
कुछ कर ऐसा .
आज मई ख़ुद से बातें करने लगा,
अकेलेपन की उस चुप्पी को तोड़ने लगा,
सोच थी जो अब तक मेरी,वो करने की घड़ी ई है,
खायी थी वो कसमें मैने,
उन्हे निभाने की घड़ी ई है,
अकेले आया है इस जग में मानुस,
कर जा इस जग में ऐसा कुछ,
की याद हमेशा के लिए रह जाएगा.
अकेलेपन की उस चुप्पी को तोड़ने लगा,
सोच थी जो अब तक मेरी,वो करने की घड़ी ई है,
खायी थी वो कसमें मैने,
उन्हे निभाने की घड़ी ई है,
अकेले आया है इस जग में मानुस,
कर जा इस जग में ऐसा कुछ,
की याद हमेशा के लिए रह जाएगा.
Friday, March 13, 2009
कुछ नई ख्वाहिशे है.
कुछ नही ख्वाहिशे है इस दिल में,
कुछ नई तम्मानाएं है ,
कुछ नई आरजू है इस दिल में,
कुछ नई आशाएं है,
नई रहे मिल रही,नए रास्ते खुल रहे,
एक नई किरण दिख रही,
एक नया उजाला हो रहा,
आज नया जोश है,आज नई उमंग है,
दिल में कुछ कर गुजरने की ,एक नई तरंग है,
उम्मीद है यह बनरहे ,ऐसी आशा करता हूँ,
पूरे साहस के साथ इन राहों पेय चलता हूँ,
रे मना चल पड़ इन राहों पर हंस कर,
न जाने कहाँ कंजिल मिल जाए,
न जाने कहाँ इन राहों ,शायद जिंदगी भी गले लगाये.
कुछ नई तम्मानाएं है ,
कुछ नई आरजू है इस दिल में,
कुछ नई आशाएं है,
नई रहे मिल रही,नए रास्ते खुल रहे,
एक नई किरण दिख रही,
एक नया उजाला हो रहा,
आज नया जोश है,आज नई उमंग है,
दिल में कुछ कर गुजरने की ,एक नई तरंग है,
उम्मीद है यह बनरहे ,ऐसी आशा करता हूँ,
पूरे साहस के साथ इन राहों पेय चलता हूँ,
रे मना चल पड़ इन राहों पर हंस कर,
न जाने कहाँ कंजिल मिल जाए,
न जाने कहाँ इन राहों ,शायद जिंदगी भी गले लगाये.
Friday, March 6, 2009
हर बार ऐसा क्यूँ होता है ??
हर बार आलम वाही होता है,
पेपर आते है और आता कुछ नही होता है,
एक दूसरे की शकले देखते है,
तुझे कुछ आता है मन में सवाल यही होता है,
किताबो की धूल पहली बार झडती है,
और स्य्ल्लाबुस पहली बार खुलता है,
रात -२ भर जग कर पढ़ते है,
अगली बार कुछ कर दिखायेंगे ,
मन में ख्याल यही होता है।
रोज़ नई कसमें खाते है,
रोज़ नए वादे करते है।
और रात बीतते ही,वो वादे भी गुल हो जाते है।
न जाने जिंदगी की तक़दीर क्या है,
न जाने इस दिल की तस्वीर में क्या है?
मगर ख़ुद से सवाल यही करता हूँ,
हर बार एक मंजिल पाकर,कुछ देर ठहरता हूँ।
अब तोह बस यही तम्मना है इस दिल की,
कुछ ऐसा कर जाऊँ,
मर भी जाऊँ अगर,तोह उस प्यार को अमर कर जाऊँ........
पेपर आते है और आता कुछ नही होता है,
एक दूसरे की शकले देखते है,
तुझे कुछ आता है मन में सवाल यही होता है,
किताबो की धूल पहली बार झडती है,
और स्य्ल्लाबुस पहली बार खुलता है,
रात -२ भर जग कर पढ़ते है,
अगली बार कुछ कर दिखायेंगे ,
मन में ख्याल यही होता है।
रोज़ नई कसमें खाते है,
रोज़ नए वादे करते है।
और रात बीतते ही,वो वादे भी गुल हो जाते है।
न जाने जिंदगी की तक़दीर क्या है,
न जाने इस दिल की तस्वीर में क्या है?
मगर ख़ुद से सवाल यही करता हूँ,
हर बार एक मंजिल पाकर,कुछ देर ठहरता हूँ।
अब तोह बस यही तम्मना है इस दिल की,
कुछ ऐसा कर जाऊँ,
मर भी जाऊँ अगर,तोह उस प्यार को अमर कर जाऊँ........
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