Friday, May 1, 2009

वो यार मेरा

उस यार की बेरुखी सही नही जाती,
देता है ऐसा दर्द,की तकलीफ कही नही जाती,
जब चाहा थम लिया हाथ,जब चाहा छोड़ दिया,
जिंदगी के इस सफर में,तुमने मुँह जो मोड़ लिया।

हमने न की शिकायत किसी से,न किया कोई शिकवा,
चलते चले गे इन राहों पेय,कभी न किसी से यह दर्द कहा,
क्या न किया था मैंने,क्या कमीं थी मेरे प्यार में,
ठोकर मारी दिल को मेरे,खड़ा रहा तनहा और लाचार मई।

दिल के इस बाज़ार में मेरा प्यार क्यूँ नीलम किया?,
रोंद दिया दिल को मेरे,और मुझको ही बदनाम किया,
हमनें तोह हंसके सही तेरी यह बेवफाई भी,
खुशी से सही तेरी यह रुसवाई ही भी,
तकलीफ तोह पहले ही था,इस बार बस शकल बदल कर ई थी।

चली गई मुझे छोड़ कर
मेरी राहों से अपना मुँह मोड़ कर,
खुश रहे तू सदा,
यही इस दिल की सदा है,
किया था प्यार मैंने कभी,
शायद यही मेरी सज़ा है।

पर बी ख़ुद से भी किया एक वादा ,
अब कभी न करेंगे प्यार,
कर लिया ,जिनता करना था मैने इंतज़ार,
सह लिया,जितना सहना था ,
अब न करेंगे हम किसी से दरकार,
अब न करेंगे हम किसी से दरकार.................

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