Tuesday, May 5, 2009

Ek naya din,ek naya khayal.....

आज यह दिल कुछ घबराया सा है,
न चाहते हुए भी,यह डर मेरा हमसाया सा है,
चले थे जिन राहोय पेय अकेले हम,
आज भी खुद को कुछ तनहा पाया सा है।

कहें गम से भरी है दिल,
कहीं आंसुओं से नम है आँखें,
कहीं दर्द से भरे है लम्हे,
कहीं इन्तेज़ार से भरी यह आन्हे॥

हर घडी इस दिल में एक ख्याल होता है,
कुछ छूट गया क्या पीछे,बस यही सवाल होता है,
यूँ तो सवाल कई है,पर न जाने क्यूँ दिल इसपे अटका है,
मिल जाये जो जवाब इसका तोह दिल क्या ,जान भी इसपे सजदा है...

पर बहुत तेज़ दौड़ रही है ज़िन्दगी,
और बहुत तेज़ दौड़ रहे है हम,
अन्धो की इस अंधी दौड़ में,
लड़ खडा रहे मेरे कदम...

ज्यादा कुछ नहीं मांगता खुदा से,
बस इतनी सी दुआ मांगता हूँ,
भटक न जाये मेरा दिल कहीं,
इस अंधियारे में,बस वो हसीन सुबह मांगता हूँ........................

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