तोह एक श्याम और ढल गई,
तस्वीरे ज़िन्दगी थोडी बदल गई,
सोचा जब कल के बारें में,
तो तबियत थोडी मचल गई।
आदत हो गई थी तुम यूँ,
की यारों से मिलकर ही अत था सुकून,
पर आज जब ख़तम हो रहा एक अध्याय ,
तोह न जाने,कुछ बिचाद जाने की फिकर सता रही क्यूँ?
कुछ थी शिकायते ,कुछ थी बातें,
कुछ तनहा कटी जो रातें,
एक दिल की बात जो उससे कहनी चाही,
पर कुछ खो जाने के डर से जुबान कह न पाई।
पर याद रह जाएँगी ये बातें,
कुछ खट्टी,कुछ मीठी मुलाकातें,
तोह अब बढेंगे कदम,दुन्देंगे नई राहे,
अभी पुरी ज़िन्दगी पड़ी है पसारे अपनी बाहें।
तोह जीना अपनी ज़िन्दगी पूरी तरह,
यही इस दिल की तमन्ना है मेरी,
हंस लेंगे हम भी एक हँसी,
जब याद आयेगी तेरी..
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