उसके हुस्न से तोह चाँद भी शर्माता है,
नही दिखते जब तुम,तभी अंधेरे निकलकर बाहर आता है,
घबराता है कहीं उसकी चाँदनी कहीं फीकी न पड़ जाए,
कहीं इस चाँद को देखकर ,सब उस चाँद को न भूल जाए।
उसकी खूबसूरती तोह समंदर की तरह है,
जो जब देखो ,एक नया और प्यारा एहसास लाती है,
बस फर्क यही है,की समंदर को तो पा सकता हूँ मै,
मगर उसकी एक झलक के लिए भी आंखें तरस जाती है।
उसकी हँसी एक पंछी की तरह है,
जहाँ जाती है खुशियाँ लाती है,
देख लूँ जो एक सुब उसे ,
तोह फीकी इस ज़िन्दगी में जैसे रंग भर जाती है।
चाहता हूँ उसे मिले सारा जहाँ और यह सारा आस्मां,
ताकि सपनो के पंख लगा कर उड़ सके वो,अपनी सपनो की उड़ान,
ताकि हम भी कह सके,की कभी हमने भी किया था प्यार,
और बस इतनी सी अपनी दास्तान॥
वाह भैया किसके बारे में इतना अच्छा अच्छा लिखा जा रहा है ??? :)
ReplyDeleteवीनस केसरी