Tuesday, April 21, 2009

इन पालो के भी कुछ सवाल है.

आज हर लम्हा ,मुझसे है पूछता,
की क्या उया उन लम्हों का जो तुने अकेले बिताये,
क्या हुआ उन रातो का जो ,
तुने अकेले अश्क बहाए,
है कोई हिसाब ,उस दर्द का ,
जो तुने तनहा सहा,
है कोई हिसाब उस अकेलेपन,
जो तुने तनहा जीया,
यूँ तोह हर पल ज़िन्दगी की एक दास्ताँ गाता है,
हर एक पल,उस दर्द की कहानी सुनाता है,
अब तोह नैनो का पानी भी सूख गया,
अब तोह पलकों ने झपकना भी छोड़ दिया,
पर हर शाम,अकेलेपन में तेरी याद यूँ आती है,
की लगता है,यह अकेलापन ही मेरा साथी है,
कोई गिला नही मुझे,न कोई शिकवा है,
जो बीत गया सो बीत गया,
उसपे बस किसका है,
पर कभी जो हुई मुलाकात,तोह तुम्हे यह भरोसा दे जायेंगे,
ज़िन्दगी तोह कर ही थी तुम्हारे नाम,
आखिरी सांसे भी तुम्हरे नाम कर जायेंगे....

1 comment:

  1. तुषार जी,अपने मनोभावों को बहुत सुन्दर शब्द दिए हैं।बधाई।

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